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शनिवार, 23 जनवरी 2010

स्टीविया की खेती

SURENDER SINGH CHAUHAN "KAKA"
स्टीविया की खेती
औषधीय पौधे *** स्टीविया

जलवायु:
स्टीविया की खेती भारतवर्ष में पूरे साल भर में कभी भी करायी जा सकती हैइसके लिये अर्धआद्र एवं अर्ध उष्ण किस्म की जलवायु काफी उपयुक्त पायीजाती है ऐसे क्षेत्र जहाँ पर न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे चला जाता हैवहाँ पर इसकी खेती नही करायी जा सकती ११० सेन्टीग्रेड तक के तापमान मेंइसकी खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है
भूमि:
स्टीविया की सफल खेती के लिये उचित जल निकास वाली रेतीली दोमट भूमि जिसकापी०एच० मान ६ से ८ के मध्य हो, उपयुक्त पायी गयी है जल भराव वाली याक्षारीय जमीन में स्टीविया की खेती नही की जा सकती है
प्रजातियां:
स्टीविया की १५० स्पीशीज में से केवल ५ स्पीशीज खेती के लिये उपयुक्त हैजिनमें रीबाऊदियाना सबसे उपयुक्त है क्योंकि इसमें र्प्याप्त मात्रा मेंग्लूकोसाइड पाये जाते है ग्लूकोसाइड के आधार पर विभिन्न जलवायु हेतु सनफ्रट्स लिमिटेड, पूना द्वारा तीन प्रजातियों का विकास किया गया हैएस०आर०वी १२३- स्टीविया की इस किस्म में ग्लाईकोसाइड की मात्रा ९-१२प्रतिशत तक पायी जाती है तथा वर्ष भर में इसकी पांच कटाईयां ली जा सकतीहै
एस०आर०वी० ५१२- स्टीविया की यह किस्म उत्तर भारत के लिये ज्यादा उपयुक्तहै, वर्ष भर में इसकी चार कटाईयां ली जा सकती है तथा इसमें ग्लूकोसाइड कीमात्रा ९-१२ प्रतिशत तक होती हैएस०आर०वी० १२८- स्टीविया की यह किस्म सम्पूर्ण भारत वर्ष के लियेसर्वोत्तम है इसमें ग्लूकोसाइड की मात्रा २१ प्रतिशत तक पायी जाती है तथावर्ष में चार कटाईयां भी ली जा सकती है
रोपङ:
स्टीविया का रोपङ कलमो द्वारा किया जाता है वैसे तो वर्ष भर में कभी लगाई जा सकती है लेकिन उचित समय फरवरी-मार्च का महीना है तापमानएवं लम्बे दिनों का फसल के उत्पादन पर अधिक प्रभाव पङता होता है स्टीवियाके पौधों का रोपङ मेङो पर किया जाता है इसके लिये १५ सेमी० ऊचाई के २ फीटचौङे बेड बना लिये जाते है तथा उन पर कतार से कतार की दूरी ४० सेमी० एवंपौधों में पौधें की दूरी २०-२५ सेमी० रखते है दो बेङो के बीच १.५ फीट कीजगह नाली या रास्ते के रूप में छोङ देते है
खाद एवं उर्वरक:
क्योकि स्टीविया की पत्तियों का मनुष्य द्वारा सीधे उपभोग किया जाता हैइस कारण इसकी खेती में किसी भी प्रकार की रसायनिक खाद या कीटनाशी काप्रयोग नहीं करते है एक एकङ में इसकी फसल को तत्व के रूप में नत्रजन,फास्फोरस एवं पोटाश की मात्रा क्रमश: ११० : ४५ : ४५ कि० ग्रा० कीआवश्यकता होती है इसकी पूर्ति के लिये ७०-८० कु० वर्मी कम्पोस्ट या २००कु० सङी गोबर की खाद पर्याप्त रहती है साथ ही साथ फसल की कटाई के पश्चात०.२ प्रतिशत गोमूत्र का छिङकाव तथा एक किग्रा० सी०पी०पी० (काऊ पैट पिट)खाद १५० ली० पानी में घोलकर प्रति एकङ छिङकाव करना चाहिये
सिंचाई:
स्टीविया की फसल सूखा सहन नहीं कर पाती है फसल सूखा सहन नहीं कर पाती हैइसको लगातार पानी की आवश्यकता होती है सर्दी के मौसम में १० दिन केअन्तराल पर तथा गर्मियों में प्रति सप्ताह सिंचाई करनी चाहिये वैसेस्टीविया भी फसल में सिंचाई करने का सबसे उपयुक्त साधन स्प्रिंकलरर्स है
खरपतवार नियंत्रण:
सिंचाई के पश्चात खेत की निराई खेत की निराई- गुङाई करनी चाहिये जिससेभूमि भुरभुरी तथा खरपतवार रहित हो जाती है जो कि पौधों में वृद्धि केलिये लाभदायक होता है
रोग एवं कीट नियंत्रण-:
सामान्यत: स्टीविया की फसल में किसी भी प्रकार का रोग या कीङा नहीं लगताहै कभी-कभी पत्तियों पर धब्बे पङ जाते है जो कि बोरान तत्व की कमी केलक्षण है इसके नियंत्रण के लिये ६ प्रतिशत बोरेक्स का छिङकाव किया जासकता है कीङो की रोकथाम के लिये नीम के तेल को पानी में घोलकर स्प्रेकिया जा सकता है
कटाई:
फूलों को तोङना- क्योंकि स्टीविया की पत्तियों में ही स्टीवियोसाइड पायेजाते है इसलिये पत्तों की मात्रा बढायी जानी चाहिये तथा समय-समय पर फूलोंको तोङ देना चाहिये अगर पौधे पर दो दिन फूल लगे रहें तथा उनको न तोङाजाये तो पत्तियों में स्टीवियोसाइड की मात्रा में ५० प्रतिशत तक की कमीहो सकती है फूलों की तुङाई, पौधों को खेत के रोपाई के ३५, ४५, ६०,७५ एवं९० दिन के पश्चात एवं प्रथम कटाई के समय की जानी चाहिये फसल की पहली कटाईके पश्चात ४०, ६० एवं ९० दिनों पर फूलों को तोङने की आवश्यकता होती हैफसल की कटाई- स्टीविया की पहली कटाई पौधें रोपने के लगभग ४ महीने पश्चातकी जाती है तथा शेष कटाईयां ९०-९० दिन के अन्तराल पर की जाती है इसप्रकार वर्ष भर में ३-४ कटाईया तीन वर्ष तक ही ली जाती है, इसके बादपत्तियों के स्टीवियोसाइड की मात्रा घट जाती है कटाई में सम्पूर्ण पौधेको जमीन से ६-८ सेमी० ऊपर से काट लिया जाता है तथा इसके पश्चात पत्तियोंको टहंनियों से तोङकर धूप में अथवा ड्रायर द्वारा सूखा लेते है तत्पश्चातसूखी पत्तियों को ठङे स्थान में शीशे के जार या एयर टाईट पोलीथीन पैक मेंभर देते है
उपज-:
उपज- वर्ष भर में स्टीविया की ३-४ कटाईयों में लगभग ३५ कु० से ४० कु०सूखे पत्ते प्राप्त होते है
लाभ- वैसे तो स्टीविया की पत्तियों का अन्तर्राष्ट्रीय बाजार भाव लगभगरू० ३००-४०० प्रति कि०ग्रा० है लेकिन अगर स्टीविया की बिकीदर रू० १००/प्रति कि०ग्रा० मानी जाये तो प्रथम में एक एकङ में भूमि से ३.५ से ४.०लाख की कुल आमदनी होती है, तथा आगामी सालों में यह लाभ अधिक होता है कुलआमदनी होती है, तथा आगामी सालों में यह लाभ अधिक होता है कुल तीन वर्षोमें लगभग १ एकङ से ६-८ लाख का शुद्ध लाभ प्राप्त किया जा सकता है